भारत की संघीय कार्यपालिका

केंद्रीय कार्यपालिका के अंतर्गत राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद होती है जो राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देती है।

राष्ट्रपति: राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल के सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा करते हैं इस निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों तथा राज्य की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं राज्यों के बीच आपस में समानता तथा राज्यों और केंद्र के बीच समानता बनाए रखने के लिए प्रत्येक मत को उचित महत्व दिया जाता है राष्ट्रपति को अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक कम से कम 35 वर्ष की आलू का आयु का तथा लोकसभा का सदस्य बनने का पात्र होना चाहिए राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है तथा पुनर्निर्वाचित किया जा सकता है संविधान के अनुच्छेद 61 में निहित प्रक्रिया द्वारा उन्हें पद से हटाया जा सकता है वह राष्ट्रपति को वह उपराष्ट्रपति को संबंधित स्व हस्तलिखित पत्र द्वारा त्याग पत्र के माध्यम से अपना पद त्याग सकता है।

कार्यपालिका के समस्त अधिकार राष्ट्रपति में निहित होते हैं वह इनका उपयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ सरकारी अधिकारियों द्वारा करता है रक्षा सेनाओं की सर्वोच्च कमान भी राष्ट्रपति के पास होती है राष्ट्रपति को संसद का अधिवेशन बुलाने उसका सत्रावसान करने संसद को संबोधित करने तथा संदेश भेजने लोकसभा को भंग करने दोनों सदनों के अधिवेशन की सिफारिश करने तथा विधेयकों को स्वीकृति प्रदान करने क्षमा दान करने दंड रोकने अथवा उसमें परिवर्तन या कमी करने या कुछ मामलों में दंड को स्थगित करने छूट देने या दंड को बदलने के अधिकार प्राप्त हैं किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था के विफल हो जाने पर राष्ट्रपति उस सरकार के संपूर्ण या कोई भी अधिकार अपने हाथ में ले सकता है।

यदि राष्ट्रपति को इस बारे में विश्वास हो जाए की कोई ऐसा गंभीर संकट पैदा हो गया है जिससे देश अथवा उसके किसी भाग की सुरक्षा को युद्ध अथवा बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह का खतरा उत्पन्न हो गया है‚ तो वह देश में आपात स्थिति की घोषणा कर सकता है।

उपराष्ट्रपति: उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा एक निर्वाचक मंडल के सदस्य करते हैं। निर्वाचक मंडल में दोनों सदनों के सदस्य होते हैं उपराष्ट्रपति को अनिवार्य रूप से भारत का नागरिक‚ कम से कम 35 वर्ष की आयु का और राज्यसभा का सदस्य बनने का पात्र होना चाहिए उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। और उन्हें इस पद पर पुर्निनर्वाचित भी किया जा सकता है संविधान के अनुच्छेद 67 (ख) में निहित कार्यविधि द्वारा उन्हें पद से हटाया जा सकता है।

उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। जब राष्ट्रपति बीमारी या अन्य किसी कारण से अपना कार्य करने में असमर्थ हो तो या जब राष्ट्रपति की मृत्यु या पदत्याग अथवा पद से हटाए जाने के कारण राष्ट्रपति का पद रिक्त हो गया हो। तब 6 महीने के भीतर नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक उपराष्ट्रपति‚ राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है। ऐसी स्थिति में वह राज्यसभा के सभापति के रूप में कार्य नहीं करता है।

 

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