भारत की भौगोलिक एवं प्राकृतिक संरचना

भारत की सीमा उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान‚ उत्तर में चीन भूटान तथा नेपाल‚ सुदूर पूर्व में म्यांमार और पूर्व में बांग्लादेश से लगती है। पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी से निर्मित एक तंग समुद्री चैनल श्रीलंका को भारत से अलग करता है। देश को मुख्य रुप से छह अंचलों उत्तरी‚ दक्षिणी‚ पूर्वी‚ पश्चिमी‚ मध्यवर्ती और पूर्वोत्तर अंचलों में विभक्त किया गया है। यहां 29 राज्य और सात केंद्र शासित प्रदेश है।

भारत की भौगोलिक संरचना: भौगोलिक क्षेत्र मुख्य रूप से भौतिक विशेषताओं का अनुसरण करता है और इसे तीन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है। यह है- हिमालय और उससे जुड़ी पर्वतमालाओं का समूह‚ सिंधु गंगा का मैदान और प्रायद्वीपीय ढाल।

उत्तर में हिमालय और पूर्व में गंगा लुशाई पर्वत निर्माण करने वाली हलचलों से निर्मित क्षेत्र हैं। इस क्षेत्र का अधिकतर भाग जो आज विश्व की कुछ सर्वाधिक मनोरम पर्वतीय दृश्य प्रस्तुत करता है। वह करीब 7 करोड़ वर्ष पूर्व समुद्र था। करीब 7 करोड़ वर्ष पहले शुरू हुई हलचलों से हुए पर्वत निर्माण की श्रंखलाओं में तलछटी चट्टानों ने अधिक ऊंचाई ग्रहण कर ली‚ मौसमी परिवर्तन और भूरक्षण से चट्टानों के टूटने के कारण मैदानों का निर्माण हुआ जो आज हमें दिखाई देता है। सिंधु गंगा के मैदान विस्तृत कछारी क्षेत्र है जो उत्तर में हिमालय को दक्षिण के प्रायद्वीप से अलग करता है। प्रायद्वीप अपेक्षाकृत स्थिर क्षेत्र हैं और इसमें कभी कभार भूकंप से हलचल पैदा होती है। इस क्षेत्र में 380 करोड़ वर्ष पूर्व धरती के निर्माण के समय अत्यंत प्राचीन कायांतरित शैल पाए जाते हैं शेष चट्टानों में गोडवाना संरक्षण दक्षिणी पठार संरचना और कम प्राचीन तलछट भूमि शामिल है।

भारत की प्राकृतिक संरचना: मुख्य भूमि चार भागों- विशाल हिमालय छेत्र‚ गंगा और सिंधु के मैदान‚ रेगिस्तानी क्षेत्र और दक्षिणी प्रायद्वीप में बांटी गई है।

हिमालय पर्वतमाला में 3 लगभग समानांतर श्रंखलाएं हैं जो बड़े पठारों और घाटियों से विभाजित है। जिनमें से कश्मीर और कुल्लू जैसी कुछ विस्तृत और अत्यंत उपजाऊ घाटियां प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। इन पर्वतमालाओं में विश्व की कुछ सबसे ऊंची चोटिया स्थित हैं। समुद्र तल से बहुत अधिक ऊंची होने के कारण इसके कुछ दर्रों से होकर ही यात्रा की जा सकती है। जिनमें दार्जिलिंग के उत्तर पूर्व में चुंबी घाटी होते हुए मुख्य भारत तिब्बत व्यापार मार्ग पर स्थित जेलेप ला‚ नाथू ला और कल्पा यानी किन्नौर के उत्तर पूर्व में सतलुज घाटी में शिपकीला प्रमुख है। पर्वतमाला करीब 2400 किलोमीटर में फैली है जो अलग-अलग  स्थानों पर 240 से 320 किलोमीटर तक चौड़ी है। पूर्व में भारत और म्यांमार तथा भारत और बांग्लादेश के बीच अपेक्षाकृत कम ऊंचाई की पर्वत श्रृंखलाएं हैं। लगभग समूचे पूर्व पश्चिम में गारो‚ खासी‚ जयंतिया और नगा पर्वत मालाएं इस श्रंखला को उत्तर दक्षिण में मिजो और रखाईं पर्वतमाला के साथ जोड़ती है।

गंगा और सिंधु के मैदानी भाग करीब 2400 किलोमीटर लंबे और 240 से 320 किलो मीटर चौड़े हैं। जो 3 विशेष नदी प्रणाली सिंधु‚ गंगा और ब्रम्हपुत्र के थालों से मिलकर बने हैं। यह मैदान नदियों की बाढ़ के साथ बहकर आई कछारी मिट्टी से बने दुनिया की सबसे बड़े मैदानों में से हैं। और धरती पर सर्वाधिक घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। दिल्ली में यमुना और बंगाल की खाड़ी के बीच करीब सोलह सौ किलोमीटर क्षेत्र की ऊंचाई में केवल 200 मीटर का ढाल है।

रेगिस्तानी क्षेत्र को दो भागों में बांटा जा सकता है- वृहत रेगिस्तान और लघु रेगिस्तान। वृहत रेगिस्तान कच्छ के रण से उत्तर की ओर लूनी नदी तक फैला है समोच्च राजस्थान सिंध सीमावर्ती क्षेत्र इस समय इसमें समाहित है। लघु रेगिस्तान का विस्तार जैसलमेर और जोधपुर के बीच लोनी से उत्तर पश्चिम तक है। वृहत और लघु रेगिस्तान के बीच बंजर भूमि क्षेत्र है जिसमें चूना पत्थर की पहाड़ियों से सटी चट्टानी भूमि शामिल है।

प्रायद्वीपीय पठार गंगा और सिंधु के मैदानों से सटा है जिसमें 460 से 1220 मीटर तक अलग-अलग ऊंचाई वाले पहाड़ और पर्वत मालाएं शामिल है इन में अरावली‚ विंध्य‚ सतपुड़ा‚ मैकाल और अजंता पर्वत मालाएं प्रमुख है। प्रायद्वीप के एक तरफ पूर्वी घाट स्थित है। जिनकी ऊंचाई करीब 610 मीटर है और दूसरी तरफ पश्चिमी घाट है जिनकी ऊंचाई सामान्यतः 915 से 1220 मीटर तक है जो कुछ स्थानों पर 2440 मीटर तक जाती है। पश्चिमी घाटों और अरब सागर के बीच एक संकीर्ण तटवर्ती पट्टी है जबकि पूर्वी घाटों और बंगाल की खाड़ी के बीच वृहत्तर तटवर्ती क्षेत्र है। पठार का दक्षिणी बिंदु नीलगिरी पर्वतमाला से निर्मित है जहां पूर्वी और पश्चिमी घाट मिलते हैं उसके परे कार्डमम हिल्स है जिसे पश्चिमी घाट का विस्तार माना जा सकता है।

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